सभ्यता और संस्कृति में अंतर
प्राय: सभ्यता और संस्कृति को एक ही मान लिया जाता है, परंतु इनमें गहरा भेद है। सभ्यता में मनुष्य के जीवन का भौतिक पक्ष प्रधान है अर्थात सभ्यता का अनुमान भौतिक सुख-सुविधाओं से लगाया जाता…
प्राय: सभ्यता और संस्कृति को एक ही मान लिया जाता है, परंतु इनमें गहरा भेद है। सभ्यता में मनुष्य के जीवन का भौतिक पक्ष प्रधान है अर्थात सभ्यता का अनुमान भौतिक सुख-सुविधाओं से लगाया जाता…
महात्मा बुद्ध की मृत्यु के पश्चात उनके उपदेशों को संकलित करने, बौद्ध धर्म का प्रचार- प्रसार एवं सुधार के लिए समय-समय पर सभाओं का आयोजन किया गया। इन महासभा में उठे मतभेदों के कारण चतुर्थ…
हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें। दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।प्रार्थना । जय और विजय एक दूसरे के पूरक है। जहां विजय है, वहां जय-जयकार होगा ही। जय - जय एक संयुक्त प्रयास,…
यदि आपके कार्यक्षेत्र में आपके साथ महिला कर्मचारी भी काम करते हैं तो कृपया इन बातों का ध्यान रखकर आप स्वंय सम्मानित रह सकते हैं और महिला को भी सम्मान देकर एक अच्छे मित्र बन…
यदि हम उन्नति चाहते हैं हमें वाणी के महत्व को समझना होगा।वार्तालाप ऐसा मंत्र है जिससे लोगों को आसानी से जीता जा सकता है अपना बना जा सकता है और उनका सहयोग लिया जा सकता है।व्यक्ति…
प्रेम - मानसिक वेदना प्रेम से भरा संसार चाहिए, अच्छा, तुम्हें भी थाली में चांद चाहिए। प्यार में सफल, जीवन में असफल, देंगे मानसिक वेदना प्रमाण चाहिए। सपने की दुनिया रंगीन होती है, हकीकत में…
आधुनिक काल में बने बनाए फ्लैट और घरों में रहना पड़ता है। ऐसे में उन घरों के नक्शे वास्तु शास्त्र के अनुसार बने हो यह जरूरी नहीं है। यह भी संभव नहीं है कि पूरा…
अहम, वहम और रहम तीनों ही मनुष्य की मनोदशा दर्शाते। अहम और वहम जहां मनोरोग हैं वहीं रहम मनोबल है। अहम और वहम विकार हैं जिनका इलाज रहम है। तुलसीदास जी ने तो रहम को…
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उसकी रीढ़ की हड्डी के समान होती है। यदि उस देश के व्यवसाय भली प्रकार विकसित न हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वयं को साबित न कर पा रहे हो…
काम ,क्रोध ,मद ,लोभ सब नाथ नरक के पंथ। - तुलसीदास जी क्रोघ पर कुछ सूक्तियां शक्तिशाली व विनाशकारी भाव है -क्रोध क्रोध हवा का वह झोंका है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता…
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