इस दुनिया में जन्म लिया,
माँ से जीवन की सीख मिली।
पिता से जिम्मेदारियों का अर्थ जाना,
और भाई से जीवन का खेल समझा।
वक़्त ने ऐसी रफ़्तार पकड़ी,
मानो कई बरस बीत गए हों।
फिर जीवन में एक उलझा हुआ मोड़ आया,
उस मोड़ का नाम था — मोहब्बत।
क्या है यह मोहब्बत?
जो दिल को भा जाए,
या जो मन पर अपना अक्स छोड़ जाए?
मोहब्बत आपके जीवन को नई दिशा देती है,
आपको एक बेहतर इंसान बनाती है।
शायर की मोहब्बत उसका अधूरा प्यार,
चित्रकार की मोहब्बत उसका बेरंग कैनवास।
मोहब्बत शुरुआत है या अंत?
मोहब्बत करने के लिए क्या इंसान होना ज़रूरी है,
या किसी की मोहब्बत बनने के लिए?

