मैं और मेरी मोहब्बत

इस दुनिया में जन्म लिया,
माँ से जीवन की सीख मिली।
पिता से जिम्मेदारियों का अर्थ जाना,
और भाई से जीवन का खेल समझा।

वक़्त ने ऐसी रफ़्तार पकड़ी,
मानो कई बरस बीत गए हों।
फिर जीवन में एक उलझा हुआ मोड़ आया,
उस मोड़ का नाम था — मोहब्बत।

क्या है यह मोहब्बत?
जो दिल को भा जाए,
या जो मन पर अपना अक्स छोड़ जाए?

मोहब्बत आपके जीवन को नई दिशा देती है,
आपको एक बेहतर इंसान बनाती है।
शायर की मोहब्बत उसका अधूरा प्यार,
चित्रकार की मोहब्बत उसका बेरंग कैनवास।

मोहब्बत शुरुआत है या अंत?
मोहब्बत करने के लिए क्या इंसान होना ज़रूरी है,
या किसी की मोहब्बत बनने के लिए?

मोहब्बत तो एक मुकम्मल एहसास है,
जिसे प्रकृति का हर जीव महसूस कर सकता है।
इसमें न किसी की जीत है, न किसी की हार,
मोहब्बत तो जीवन का आधार है।

मोहब्बत दिल का सुकून है,
मोहब्बत सम्मान है,
मोहब्बत में उम्र भर की ज़िंदगी कुछ पलों में जी ली जाती है।

हर किसी की ज़िंदगी में मोहब्बत दस्तक देती है,
चाहे वह किसी भी रूप में आए।
जो आपको सही लगे,
उसे स्वीकार कर लीजिए।

मेरी मोहब्बत तो मेरी ज़िंदगी पर अपने निशान की मुहर लगा चुकी है।
अब तो बस इम्तिहान का नतीजा आना बाकी है—
क्या मैंने मोहब्बत को समझा,
या मोहब्बत ने मुझे कोई सबक सिखाया?

अब क्या ही फ़र्क पड़ता है,
अब तो अगले स्टेशन पर ज़िंदगी की रेलगाड़ी से उतरने का समय आ गया है।

निशांत गुप्ता

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