इस्लाम-संपूर्ण जानकारी लगभग 570-1200 ई0

History of islam in hindi
  • 1.इस्लाम से पूर्व -अरब लोग कबीलों में बॅटे हुए थे ।हर कबीले का अपना देवी-देवता होता था। देवालयो में बुतों की पूजा की जाती थी।
  • 2.पैगंबर मोहम्मद का प्रारंभिक परिचय-इनका जन्म 22 अप्रैल 571ई॰को मक्का में हुआ ।इनका कबीला कुरैश था, जिसका नियंत्रण मक्का के प्रमुख धर्म स्थल पर था।
  • 3.पैगंबर मोहम्मद का विवाह-595 ईसवी में पैगंबर मुहम्मद की खदीजा से शादी हुई।खदीजा मक्का में व्यापार करती थी और धनी थी आगे चलकर उन्होंने इस्लाम का समर्थन किया।
  • 4.काबा-काबा एक घनाकार ढांचा था जिसमें बुत रखे हुए थे ।यह एक पवित्र स्थल था हर वर्ष यहां इबादतगार धार्मिक यात्रा हज करते थे। इसे एक ऐसी पवित्र जगह (हरम) माना जाता था, जहां हिंसा वर्जित थी यह एक प्राचीन धार्मिक स्थल था।
  • 5.रसूल की घोषणा-612 ई॰ के आसपास पैगंबर मोहम्मद ने अपने आप को खुदा का संदेशवाहक (रसूल) घोषित किया और अल्लाह की इबादत का संदेश दिया।
  • 6.मक्का से मदीना(हिजरा )-622ई॰मैं पैगंबर मोहम्मद को धनी लोगों के विरोध के कारण मक्का से मदीना जाने के लिए मजबूर होना पड़ा ।जिस वर्ष उनका आगमन मदीना में हुआ उस वर्ष से मुस्लिम कैलेंडर यानी हिजरी सन् की शुरुआत हुई।
  • 7.इस्लाम का प्रसार– पैगंबर मोहम्मद का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने लगा। उनकी प्रतिष्ठा के कारण बहुत से समुदाय, कबीले इस्लाम धर्म स्वीकार करने लगे, उन्होंने मक्का को जीत लिया और काबा से बुतों को हटा दिया गया क्योंकि मुस्लिमों के लिए यह जरूरी था कि वे उस स्थल की ओर मुॅह करके  इबादत करें।
  • 8.शिया और सुन्नी विवाद -662 पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के साथ ही शिया और सुन्नी विवाद शुरू हो गया था ।जो लोग अली को  जोकि मुहम्मद साहब का चचेरा भाई और दामाद था,  को खलीफा बनाने के पक्ष में थे वह शिया कहलाए और जो अबू बकर को खलीफा बनाने के पक्ष में थे वह सुन्नी मुसलमान कहलाए गए। इनके विवाद अब तक चलते आ रहे हैं।
  • 9.खलीफा ओं का आगमन– पैगंबर साहब की मृत्यु के बाद 632 से 651 तक पैगंबर के प्रतिनिधि खलीफा बन गए। पहले खलीफा अबू बकर ने अरब में फैले विद्रोह का दमन किया।दूसरे खलीफा उमर के तीन सफल अभियानों 637 से 642 अरबो ने सीरिया , ईरान, ईराक और मिस्र की मदीना को जीत लिया इन्होंने बाइजेटाईन साम्राज्य (ईसाई मत) और ससानी साम्राज्य प्राचीन धर्म (ज़रतुश्क) को संधि करने के लिए मजबूर कर दिया। तीसरा खलीफा उथमान 644 से 56 भी एक कुरैश था उसने अधिक नियंत्रण प्राप्त करने के लिए प्रशासन को अपने ही आदमियों से भर लिया उसका काफी विरोध हुआ अतः उथमान की हत्या कर दी गई। चौथा खलीफा अली 656 से 61 नियुक्त हुए इन्होंने प्रसिद्ध ऊंट की लड़ाई (657) में पैगंबर मुहम्मद की पत्नी, आयशा के नेतृत्व वाली सेना को युद्ध में पराजित किया इनका दूसरा युद्ध जोसेफिन उत्तरी मेसोपोटामिया में हुआ था संधि के रूप में समाप्त हुआ जिससे इनके अनुयाई दोनों में बैठ गए जो इनका साथ छोड़ कर गए उन्हें खरजीकहा गया बाद में एक खरजी के द्वारा ही अली की हत्या कर दी गई।
  • 10.उमय्यद वंश(661-750) – गृह  युद्ध के बाद ऐसा प्रतीत होता था कि अरब विखंडित हो जाएगा, कुरैश कबीले के ही एक समृद्ध वंश उमय्यद ने इसे पुनः संगठित किया पहले उमय्यद खलीफा मुआविया ने नवीन परिवर्तन किए जिनके फलस्वरूप इनकी सत्ता 90 वर्ष तक रही। अब्द अल मलिक ने अरबी को प्रशासनिक भाषा और सलीम और अग्नि वेदी के चिहृ वाले सिक्कों को हटा दिया गया और सिक्कों पर अब अरबी भाषा में लिखा गया साथ ही जेरूसलम में डोम ऑफ राॅक बनवा कर अरब इस्लामी पहचान का विकास किया।
  • 11.अब्बासी शासन(750 से 945)-अब्बासी जो पैगंबर के चाचा अब्बास के वंशज थे इन्होंने दवा नामक एक सुनियोजित आंदोलन से उमय्यद वंश को उखाड़ फेंका ।अब्बासियों ने पैगंबर मुहम्मद के मूल इस्लाम को पुनः स्थापना करने का प्रण लिया।
  • 12.खिलाफत का विघटन-अब्बासी वंश (200वर्ष)के शासन के बाद धीरे-धीरे कमजोर होता गया जिसके कई कारण थे शिया सुन्नी विवाद और गृहयुद्ध।
  • 13.फ़ातिमी खिलाफत की स्थापना(969)- शिया राजवंश फातिमी की महत्वाकांक्षा  थी कि वह इस्लामी जगत पर शासन करें। इनका संबंध शिया संप्रदाय के इस्लाइली से था। उनका दावा था कि वे पैगंबर की बेटी फातिमा के वंशज है इसलिए वह इस्लाम के एकमात्र शासक है उन्होंने मिश्र को जीता और वहां फ़ातिमी खिलाफत की स्थापना की।
  • 14.दसवीं और ग्ययरवीं  शताब्दियों में तुर्की सल्तनत के उदय से अरबों और ईरानियो के साथ एक तीसरा प्रजातीय समूह जुड़ गया यह खानाबदोश ईबाइली लोग थे जिन्होंने धीरे धीरे इस्लाम को स्वीकार कर लिया।
  • 15.धर्म युद्ध(1095-1291)-जेरूसलम और फिलिस्तीन के अधिकार के लिए मुसलमान और ईसाइयों में अनेक युद्ध हुए इन्हें धर्म युद्ध का नाम दिया जाता है। प्रथम धर्म युद्ध(1098-1099) इसमें फ्रांस और इटली के सैनिकों ने सीरिया और जेरूसलम पर कब्जा कर लिया शहर में मुसलमानों और यहूदियों की हत्या की गई ,परंतु कुछ समय पश्चात तुर्को ने इसे पुनः हासिल कर लिया। दूसरा धर्म युद्ध (1145-1149) जर्मन और फ्रांस की सेना ने दमिश्क पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन उन्हें हराकर घर लौटे के लिए मजबूर कर दिया गया।1187 ई सलाह अल दीन ने ईसाइयों के विरुद्ध धर्म युद्ध करने का आह्वान किया और उन्हें पराजित किया जेरूसलम पर कब्जा कर लिया और कई गिरजाघरो को मस्जिदों में बदल दिया और जेरूसलम एक बार फिर मुस्लिम शहर बन गया। तीसरा धर्म युद्ध (1189) जेरूसलम पर कब्जा करने के लिए तीसरा धर्म युद्ध हुआ परंतु् इस युद्ध में ईसाई तीर्थयात्रियों के लिए जेरूसलम में मुक्त रूप से प्रवेश के सिवाय कुछ ना मिलाअंततः1291 में धर्म युद्ध करने वाले सभी ईसाइयों को फिलिस्तीन से बाहर निकाल दिया गया । धीरे-धीरे यूरोप की इस्लाम में सैनिक दिलचस्पी समाप्त हो गई।
  • 16.इन सभी युद्धों के कारण यूरोप और  पश्चिमी एशिया कमजोर हो गया और मंगोलो का सामना ना कर पाया । चंगेज खान के आक्रमणों के आगे इन सब ने सिर झुका दिया। 1258 में मंगोलो ने बगदाद पर कब्जा कर लिया।  

आशा है ,यह संक्षिप्त जानकारी आपको पर्याप्त रही होगी।धन्यवाद

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