आधुनिक काल में बने बनाए फ्लैट और घरों में रहना पड़ता है। ऐसे में उन घरों के नक्शे वास्तु शास्त्र के अनुसार बने हो यह जरूरी नहीं है। यह भी संभव नहीं है कि पूरा नक्शा ही बदल दिया जाए। ऐसी परिस्थितियों में यदि हम दिशा के हिसाब से रसोई, बाथरूम, कमरे ,प्रवेश द्वार के बारे में सोचें तो हम परेशान हो सकते हैं।इससे अच्छा है कि हम ऐसे छोटे-छोटे उपाय करें जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बड़े और खर्चा भी न हो।
इसके अतिरिक्त इन निर्देशों का पालन करके आप वास्तुदोष कम कर सकते हैं :-
- प्रतिदिन शंख या घंटी बजाएं इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा व हानिकारक सूक्ष्म जीव समाप्त हो जाते हैं और सकारात्मक शक्ति का प्रभाव बनता है।
- मंदिर में कभी भी मृत परिजनों की फोटो ना लगाएं।
- घर के कोने व छत साफ रखें।
- बैड के सामने शीशा न लगाएं जिसमें सोते ,बैठते समय आपकी छवि दिखाई दे। इससे जो अंग शीशे में दिखाई देता है। वह बीमार हो जाता है।
- झाड़ू -पोचा सीढ़ी व पलंग के नीचे ना रखें ।झाड़ू कभी खड़ी करके न रखें, झाड़ू को पैर भी न लगाएं। ऐसा करने से धन की हानि होती है।
- पानी का टपकना /बहना अशुभ होता है ।अत शीघ्र ही नल ठीक करवाएं या पानी एकत्रित करें।
- बाथरूम में नीले रंग का होना धन वृद्धि का सूचक होता है। अतः बाथरूम में नीली टाइल्स लगाए या बाल्टी आदि रख सकते हैं।
- सोने से एक घंटा पहले टीवी लैपटॉप फोन आदि इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स बंद कर दे ताकि विकिरण का प्रभाव शरीर पर न पड़े।
- घर का भारी समान (बेड सोफा सेट अलमारी आदि) के नीचे हमेशा सफाई रखें साथ ही इन्हें महीने या साल में हिलाते रहे ताकि रुकी हुई ऊर्जा का स्रोत चलाएमान हो जाए।
- घर के साथ साथ अपने मन, मस्तिक से भी नकारात्मक विचारों को निकाले तथा सकारात्मक विचारों को स्थान दें। अंत में “ मकान ईट ,पत्थर व नक्शे से बनता है परंतु घर सहयोग, विश्वास और प्रेम से बनता है। “
रोचक जानकारी
धन्यवाद
सुन्दर एवं हितकारक
आपका बहुत बहुत धन्यवाद _/\_