क्यों डरता है

क्यों डरता है

क्यों डरता है कल के अँधेरे से
क्यों डरता है आने वाले सवेरे से
सब कुछ है, बन्दे, तेरे हाथों में
तू बस जी ले पूरा इसी समय में

क्यों डरता है तू लोग-दुनिया से
क्यों डरता है तू थोड़ा गिरने से
ये सब तोहफ़े हैं तुझे सँवारने के
तू बस चलता जा इसी रंग में

क्यों डरता है पीछे रह जाने से
क्यों डरता है अक़्ल न आने से
लक्ष्य सिर्फ़ तू ही है तेरे रास्ते का
तू बस ध्यान लगा इसी जगह पे

क्यों डरता है छोटी तिजोरी होने से
क्यों डरता है तू सब कुछ खोने से
सारी कमाई-दौलत है तेरे ही अंदर
तू बस बाँट खुशी इसी समझ से

— यश

तुम जैसा कहाँ

तुम जैसा कहाँ - कविता

तुम जैसी गरिमा कहाँ,
तुम जितनी करुणा कहाँ मुझमें, सीते
राम होना ही मेरा दायरा
सीता अगली बार भी तुम ही निभाना

तुम जितना प्रेम कहाँ,
तुम जितना धैर्य कहाँ मुझमें, राधे
कृष्ण होना ही मेरा दायरा
राधा अगली बार भी तुम ही निभाना

तुम जैसा संतुलन कहाँ,
तुम जितना साहस कहाँ मुझमें, गौरी
शिव होना ही मेरा दायरा
शक्ति अगली बार भी तुम ही निभाना

— यश

मनोरंजक